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द्वितीयक क्रियाएं - 11वीं भूगोल नोट्स

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Geography April 19, 2026

द्वितीयक क्रियाएं - 11वीं भूगोल नोट्स

By admin

अध्याय 5: द्वितीयक क्रियाएं (Secondary Activities)

NCERT मानव भूगोल के मूल सिद्धांत - उच्च गुणवत्ता वाले नोट्स

द्वितीयक क्रियाएं वे गतिविधियाँ हैं जो प्राकृतिक संसाधनों (कच्चे माल) का मूल्य बढ़ा देती हैं। इसमें विनिर्माण (Manufacturing), प्रसंस्करण और निर्माण उद्योग शामिल हैं। सरल शब्दों में, यह कच्चे माल को तैयार माल में बदलने की प्रक्रिया है।

1. विनिर्माण (Manufacturing)

विनिर्माण का अर्थ है किसी वस्तु का उत्पादन। यह हस्तशिल्प से लेकर लोहे और इस्पात को गढ़ने, प्लास्टिक के खिलौने बनाने या अंतरिक्ष यान के निर्माण तक हो सकता है।

आधुनिक बड़े पैमाने पर विनिर्माण की विशेषताएं:
  • कौशल का विशिष्टीकरण (उत्पादन की विधियाँ)।
  • यंत्रीकरण (स्वचालित मशीनों का उपयोग)।
  • प्रौद्योगिकी नवाचार (गुणवत्ता नियंत्रण और अपशिष्ट का निस्तारण)।
  • विशिष्ट संगठनात्मक ढांचा और स्तरीकरण।

2. उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारक

कोई भी उद्योग लगाने से पहले लाभ और लागत का ध्यान रखा जाता है। मुख्य कारक निम्नलिखित हैं:

कारक विवरण
कच्चे माल तक पहुँच भारी और वजन घटने वाले कच्चे माल (जैसे गन्ना, लोहा) वाले उद्योग कच्चे माल के स्रोत के पास लगाए जाते हैं।
शक्ति के साधन एल्युमीनियम जैसे उद्योगों को भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होती है, इसलिए वे ऊर्जा स्रोतों के निकट होते हैं।
बाजार तक पहुँच तैयार माल को उपभोक्ताओं तक पहुँचाने के लिए परिवहन लागत कम होनी चाहिए।
श्रम आपूर्ति सस्ते और कुशल श्रमिकों की उपलब्धता विनिर्माण की लागत घटाती है।
परिवहन और संचार कच्चा माल लाने और तैयार माल भेजने के लिए तीव्र परिवहन आवश्यक है।

3. उद्योगों का वर्गीकरण

A. आकार के आधार पर

  • कुटीर उद्योग: यह निर्माण की सबसे छोटी इकाई है। स्थानीय कच्चे माल और परिवार के सदस्यों की सहायता से घर में वस्तुएं बनाई जाती हैं।
  • छोटे पैमाने के उद्योग: इसमें स्थानीय कच्चे माल और अर्ध-कुशल श्रमिकों का उपयोग होता है। यह कुटीर उद्योग से बड़ा होता है।
  • बड़े पैमाने के उद्योग: विशाल बाजार, विभिन्न प्रकार का कच्चा माल, शक्ति के साधन और उच्च तकनीक।

B. कच्चे माल के आधार पर

  1. कृषि आधारित: चीनी, अचार, फलों के रस, सूती वस्त्र।
  2. खनिज आधारित: लोहा-इस्पात (धात्विक), सीमेंट, मिट्टी के बर्तन (अधात्विक)।
  3. रसायन आधारित: पेट्रो-रसायन, प्लास्टिक, कृत्रिम रेशे।
  4. वनों पर आधारित: कागज, फर्नीचर, लाख उद्योग।
  5. पशु आधारित: चमड़ा, ऊनी वस्त्र।

C. उत्पाद के आधार पर

  • आधारभूत उद्योग: जिनके उत्पाद का उपयोग अन्य उद्योगों के लिए कच्चे माल के रूप में होता है (जैसे लोहा-इस्पात)।
  • उपभोक्ता वस्तु उद्योग: जिनका उत्पाद सीधे उपभोक्ताओं द्वारा उपयोग किया जाता है (जैसे बिस्कुट, रेडियो, साबुन)।

4. स्वच्छंद उद्योग (Footloose Industries)

ये उद्योग किसी विशिष्ट कच्चे माल पर निर्भर नहीं होते और कहीं भी स्थापित किए जा सकते हैं। ये मुख्य रूप से संघटक पुर्जों पर निर्भर होते हैं जो कहीं से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। इनमें प्रदूषण कम होता है और श्रमिकों की कम संख्या की आवश्यकता होती है।

महत्वपूर्ण प्रश्न (Board Exam Priority)

लघु उत्तरीय प्रश्न (2-3 अंक)

  1. स्वच्छंद उद्योग क्या हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
  2. कुटीर उद्योग और लघु पैमाने के उद्योग में क्या अंतर है?
  3. प्रौद्योगिकी पार्क (Technopolies) किसे कहते हैं?

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5 अंक)

  1. विश्व में उद्योगों की अवस्थिति को प्रभावित करने वाले कारकों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
  2. लोहा-इस्पात उद्योग को 'आधारभूत उद्योग' क्यों कहा जाता है? इसके वितरण की व्याख्या करें।
  3. आधुनिक बड़े पैमाने पर होने वाले विनिर्माण की प्रमुख विशेषताओं का विश्लेषण करें।

नोट: यह कंटेंट NCERT के नवीनतम पाठ्यक्रम के अनुसार तैयार किया गया है। इसे मोबाइल पर बेहतर अनुभव के लिए वर्टिकल स्क्रॉल के साथ पढ़ें।

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